आओ हम आजादी की वर्षगांठ मनाये
आओ हम आजादी की वर्षगांठ मनाये भाषण सुने या चबाये रोये या गाए चीखे चिल्लाए हमें पूरी आजादी है ! आखिर , ऐसा करते हमें इतने बरस भी तो हो गए यह अलग बात है की इतने बरसो में हमें आजादी का अर्थ नहीं जाना उसे कभी नहीं पहचाना हम दिशाहीन भटकते रहे जिसने जो दिशा दी उसी में बढ़ते रहे आजादी का अर्थ उनके लिए था जो उसके लिए लड़े मरे वो गुलाम थे हम आजाद है हमारे विचार कुर्सी के आसपास परिक्रमा लगाते उपग्रह सभ्यता मॉड हो गयी संस्कृति शॉर्ट हो गयी अब हमें सूरज का उगना अच्छा नहीं लगता उसका अंत अच्छा लगता है पूर्व बूढ़े खूसट सा खटकने लगा है पश्चिम मादक रंगो सा आँखों में चढ़ने लगा है आदर्श, तस्वीरें बनकर शासकीय कार्यालयों में लटक गए यह कहना गलत है की हम भटक गए भटकते वे है , जो किसी राह पर चलते है हमने इसी डर से कोई राह नहीं चुनी जहाँ चल दिए कदम हम चल दिए हम आज...