सुबह से शाम
चलो चले सूरज को पहाड़ पर चढ़ाए दौड़े दौदाये और खूब छकाये अँजुरी भर-भर धूप उछाले पात पात किरणें पेड़ पर चढ़ाए भर भर किल्कारिी अंबर गुंजाए चलो चले सूरज को .... मैदान में खिलाये दौड़े दौदये और खुब छकये चलो चले सूरज को ताल में दुबये साँझ घर लाए दीप् जलाये सूरज को पहाड़ पर चढ़ाए