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Showing posts from November, 2014

प्रवाह तो मिला

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चाँद न मिला, आभास तो मिला सूर्य न मिला, प्रकाश तो मिला ! गीत न मिला कोई धुन ही मिली सुने शब्द के लिए, सिलसिला तो मिला ! मंज़िल न मिली राही को मगर चलने के लिए , पंथ का विस्वास तो मिला ! थकी हुई नदी की लहरे मौन थी मंद हवा ही सही, प्रवाह तो मिला ! भटक रही थी नाव नदी की धार मैं टुटा ही सही, पर घाट तो मिला  !

इत्ते सारे काम

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नन्ही मुन्नी चिड़िया को इत्ते सारे काम न पलभर को फुर्सत न रत्ती भर आराम रोज सबेरे सूरज लाना उसको हर घर  मैं  पहुचना क्या है छोटा काम ? नन्ही मुन्नी चिड़िया को इत्ते सारे काम ! घर-आँगन की साफ-सफाई उछल-कूद  कर करती भाई क्या है छोटा काम ? नन्ही मुन्नी चिड़िया को इत्ते सारे काम ! बाजार जाना और बतियाना पाठ पढ़ना और पढ़ाना क्या है छोटा काम ?

संभल के चल

बिगड़े हुए हालात है जरा संभल के चल धूल , धुँआ , धुंध  है जरा संभल के चल पसरी हुई  है दहशते, सडको चौराहो पर तुज़हे पहुचना है घर जरा संभल के चल कोयला ही कोयला बिखरा पड़ा है मैदान मैं कैसे बच पायेगा जरा संभल के चल राह  के कुछ संगमरमरी  आचरण  भी  है     पैर  फिसल   न जाये  जरा संभल के चल ये आदर्शो की गठरी कब  तक लिए  चलेगा  हर मोड़ पर है लुटेरे जरा संभल के चल