संभल के चल

बिगड़े हुए हालात है जरा संभल के चल
धूल , धुँआ , धुंध  है जरा संभल के चल

पसरी हुई  है दहशते, सडको चौराहो पर
तुज़हे पहुचना है घर जरा संभल के चल

कोयला ही कोयला बिखरा पड़ा है मैदान मैं
कैसे बच पायेगा जरा संभल के चल

राह  के कुछ संगमरमरी  आचरण  भी  है    
पैर  फिसल   न जाये  जरा संभल के चल

ये आदर्शो की गठरी कब  तक लिए  चलेगा 
हर मोड़ पर है लुटेरे जरा संभल के चल 

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