प्रवाह तो मिला
चाँद न मिला, आभास तो मिला
सूर्य न मिला, प्रकाश तो मिला !
गीत न मिला कोई धुन ही मिली
सुने शब्द के लिए, सिलसिला तो मिला !
मंज़िल न मिली राही को मगर
चलने के लिए , पंथ का विस्वास तो मिला !
थकी हुई नदी की लहरे मौन थी
मंद हवा ही सही, प्रवाह तो मिला !
भटक रही थी नाव नदी की धार मैं
टुटा ही सही, पर घाट तो मिला !
सूर्य न मिला, प्रकाश तो मिला !
गीत न मिला कोई धुन ही मिली
सुने शब्द के लिए, सिलसिला तो मिला !
मंज़िल न मिली राही को मगर
चलने के लिए , पंथ का विस्वास तो मिला !
थकी हुई नदी की लहरे मौन थी
मंद हवा ही सही, प्रवाह तो मिला !
भटक रही थी नाव नदी की धार मैं
टुटा ही सही, पर घाट तो मिला !

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