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Showing posts from May, 2016

आओ हम आजादी की वर्षगांठ मनाये

आओ हम आजादी की वर्षगांठ मनाये भाषण  सुने या चबाये रोये या गाए चीखे चिल्लाए  हमें पूरी आजादी है ! आखिर , ऐसा करते हमें इतने बरस भी तो हो गए  यह अलग बात है की  इतने बरसो में  हमें आजादी का अर्थ नहीं जाना  उसे कभी नहीं पहचाना  हम दिशाहीन भटकते रहे  जिसने जो दिशा दी  उसी में बढ़ते रहे  आजादी का अर्थ  उनके लिए था  जो उसके लिए  लड़े मरे  वो गुलाम थे  हम आजाद है  हमारे विचार  कुर्सी के आसपास  परिक्रमा लगाते उपग्रह  सभ्यता मॉड हो गयी  संस्कृति शॉर्ट हो गयी  अब हमें सूरज का उगना  अच्छा नहीं लगता  उसका अंत अच्छा लगता है  पूर्व बूढ़े खूसट सा  खटकने लगा है  पश्चिम  मादक रंगो सा आँखों में चढ़ने लगा है  आदर्श, तस्वीरें बनकर  शासकीय कार्यालयों में लटक गए  यह कहना गलत है की हम भटक गए  भटकते वे है , जो किसी राह पर चलते है  हमने इसी डर से कोई राह नहीं चुनी  जहाँ चल दिए कदम  हम चल दिए  हम आज...

सावन तो है

आओ हम तुम सावन के गीत गाए बादल आये या न आये बरसे न बरसे रुखा सूखा ही सही सावन तो है आओ हम तुम झूले झुलाए बैठे बतियाये हरी-भरी न सही सुखी टहनी ही सही सावन तो है ! आओ हम तुम सुने - सुनाए मन बहलाए घर और बच्चे अपने हिस्से इनके किस्से रोज का ढर्रा ही सही सावन तो है !

नजर का चश्मा

जब से उन्होंने नजर का चश्मा बदला है उनका नजरिया ही बदल गया ! उन्हें अच्छे और बुरे की पहचान होने लगी है या की उनकी आँख पहेली बुझने लगी है ! डॉ रविन्द्र पहलवान मेरे पास आये काफी देर तक बैठे / बतियाये कुछ समझे कुछ समझाए बोले जोशी जी बुरा नहीं मानना एक बात कहु इस चश्मे में तुम अच्छे नहीं लगते हो मैंने कहा इसमें बुरा मानने की क्या बात है जो जैसा है वैसा की तो दिखेगा गोभी का फूल गुलाब थोड़े ही दिखेगा डॉ रविन्द्र बोले ऐसा भी नहीं है चस्मा हटा लेता हु तो तुम अच्छे लगते हो ! यह क्या जादू मंतर है मेने कहा मित्रवर दूसरों की आँखों से और अपनी आखो से देखने में यही अंतर है ! सत्य लगी आँखों से ही देखा जाता है और दूसरों के सहारे की जरुरत है तो उसकी विश्वसनीयता जरुरी है , वर्ना साडी बात अधूरी है ! मैने कहा की मित्रवर तुम्हारा चश्मा विस्वसनीयता नहीं इसे बदल दो वर्ना गंगा को यमुना और यमुना को गंगा देख जाओगे जाना होता टेलीफोन नगर राजवाड़ा पहुंच जाओगे ! पता नहीं, उन्होंने चस्मा बदला या नहीं ! लेकिन अब जब भी मेरे पास होते है ! चस्मा उतार लेते है ! शायद मेरे वेश में समू...