सावन तो है



आओ
हम तुम
सावन के गीत गाए
बादल आये या न आये
बरसे न बरसे
रुखा सूखा ही सही
सावन तो है
आओ हम तुम
झूले झुलाए
बैठे बतियाये
हरी-भरी न सही
सुखी टहनी ही सही
सावन तो है !
आओ
हम तुम
सुने - सुनाए
मन बहलाए
घर और बच्चे
अपने हिस्से
इनके किस्से
रोज का ढर्रा ही सही
सावन तो है !

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