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चापलूस सियार

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 हाए राम ये कैसा गजब हो गया ,  जंगल का राजा शेर मर गया ! फेल गई खबर सारे जंगल में, आग लग गयी सारे मंगल में ! चारो तरफ बस एक शोर हो गया, जंगल का राजा शेर मर गया !                        शेर मर गया  जंगल का राजा अब कौन बनेगा, जंगल का राजा शेरसिंह  बनेगा !  शेर सिंह के मन में था एक विचार , कैसे जंगल का चलेगा कारोबार ! कौन चापलूस है और कौन है मक्कार, कैसे ढूंढ पाउँगा में कोई वफादार ! राजतिलक का समय आ गया, राजपुरोहित भालू आ गया ! भालू ने शेर को तिलक लगाया, शेरसिंह जंगल का राजा कहलाया ! आसन से उठकर होले होले , स्वागत के उत्तर में शेरसिंह बोले  ! मेरे जंगलवासियों तुम्हारा आभार, तुमने जो डाल दिया मुझपे यह भार ! इसको उठाऊंगा में सौ सौ  बार, पहले यह बताओ यहाँ कितने वफादार ! जो जंगल के जानवर से प्रेम रखेगा, उनके लिए ही जीएगा - मरेगा ! कौन  झेल पायेगा सब दुःख के प्रहार, कौन  रहेगा मेरे  प...

बस्ता

 यह मेरा बस्ता है ,बस्ता नही गुलदस्ता है छोटी बड़ी कोपिया इस्मे छोटी बड़ी किताबे है ,  रंग -बिरंगी पेन्सिल मन मे नही दुराब है अलग विशय है सबके अपने फिर भी सग सहेली है ! तन मे काले आखट लिप्टे, पर मन की निपट उजेली है नाप का एक पैमाना है,और निर्माण की जंतारी है ! भूख मिटने का टिफिन भी इस्मे , बंद बने हुए संतरी है एक साथ सब मगन रह रहे, मिल जुल मौज मस्ता है  यह मेरा बस्ता है ,   यह मेरा बस्ता है ..........!

पढ़ो सी

मित्रवत सम्बन्ध या एक दीवार या बाजूवाले  घर एक मांगलिक कार्य के आयोजन में सम्मिलित होने का मौका मिला , ब्राह्मण और पंडित उपस्थित थे , अध्याय गंगा पूजन  प्रश्न कौंधा , नगर निगम द्वारा जलवितरण नर्मदा से होता है  जो की आजीविका और दैनन्दिनी के कार्य के लिए उपयोगी है फिर गंगा इतनी महत्वपूर्ण क्यों , शायद कभी कोई तुलसीदास की तरह खड़ा होना चाहे और वाल्मीक कहित  रामायण की विसंगतिया दूर करने के बजाये, ठीक कर सके तो फिर प्रश्न ये उठता है , अखबर कहाँ से लाये     हो सकता है कभी लोकल को भी थोड़ी तव्वजो मिल सके , क्यों की यहाँ किसी को कही नहीं जाना !

कहानी बटन की शर्ट द्वारा

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किताब - ग्रन्थ क्यों लिखी जाती है (Y 2 Right Book)

प्रश्न यह है वस्तुतः तेज दौड़ती समझदार दुनिया क्यों किताब पढ़े , किताब लिखने के लिए भी भाषा चाहिए , लिपि चाहिए ,  और अव्वल तो  लिपि और भाषा को समझने वाले लोग चाहिए  वर्ना किताब बेमानी है - यदि किताब किसी प्रहसन का रूपांतरण है तो भी यदि , वह सही भी है और भाषा और भाषाई ज्ञाताओं के परे है तो भी किताब दर्शक दीर्धा की बजाय पुस्तकालय के किसी कोने को ही शोभा बढ़ाएगी कोई भी प्रचलन तब तक नहीं चल सकता जब तक समर्थक संख्या बहुतायत में न हो ! मेरे लिए ये अभी भी शोध का ही विषय है