चापलूस सियार

 हाए राम ये कैसा गजब हो गया , 
जंगल का राजा शेर मर गया !

फेल गई खबर
सारे जंगल में,
आग लग गयी
सारे मंगल में !

चारो तरफ बस एक शोर हो गया,
जंगल का राजा शेर मर गया !
                       शेर मर गया 

जंगल का राजा
अब कौन बनेगा,
जंगल का राजा
शेरसिंह  बनेगा ! 

शेर सिंह के मन में
था एक विचार ,
कैसे जंगल का चलेगा कारोबार !

कौन चापलूस है और
कौन है मक्कार,
कैसे ढूंढ पाउँगा
में कोई वफादार !

राजतिलक का
समय आ गया,
राजपुरोहित
भालू आ गया !

भालू ने शेर
को तिलक लगाया,
शेरसिंह जंगल
का राजा कहलाया !

आसन से उठकर
होले होले ,
स्वागत के उत्तर
में शेरसिंह बोले  !

मेरे जंगलवासियों
तुम्हारा आभार,
तुमने जो डाल दिया
मुझपे यह भार !

इसको उठाऊंगा
में सौ सौ  बार,
पहले यह बताओ
यहाँ कितने वफादार !

जो जंगल के जानवर
से प्रेम रखेगा,
उनके लिए ही
जीएगा - मरेगा !

कौन  झेल पायेगा
सब दुःख के प्रहार,
कौन  रहेगा मेरे
 प्रति वफादार !

साप सूंघ गया
सारे दरबार को ,
हाथ न उठा कोई
इकरार को !

शेरसिंह गुस्से
में थोड़ा गुर्राया,
एक बार फिरसे
सवाल दोहराया !


न हाथ ही हिले
न कोई डोले ,
थोड़ी देर में सब
सियार बोले
हम वफादार
हम है वफादार ! 

जानवरो के हित
मरने को तैयार !


चुपचाप थे
हाथी चंद चितालाल,
यह देख हुआ
गुस्से में शेरसिंह लाल !

क्या बाकि सब है
यहाँ गैर वफादार ,
कैसे इस जंगल के
वे है हकदार !

हाथी चंद बोले
राजा विनती यही ,
गरजते है घन
वो बरसते  नहीं ! 

चिता लाल बोले मुझे
मिले पनाह ,
थोथा चना जरा
बाजे घना !

जो होते है वफादार
वे चिल्लाते नहीं !
बरसते है घन,
जो गरजते नहीं !

शेरसिंह को बात
कुछ समझ आ गयी,
सियारो की चापलूसी
याद आ गयी !

शेरसिंह ने मंत्री
परिषद् बनाया ,
सियारो का नामो
निशान मिटाया !

कामयाब हो गयी
राजा की यह चाल ,
चापलूसों का होता है
यही हाल !


Comments

Popular posts from this blog

मर गया होता

तुम आये नहीं

इत्ते सारे काम