ठंड

गाँव शहर घूम रही बद्द्बद्दति ठंड
उसको डरा ना पा रही आग भी प्रचंड

बंद है दरवाजे और सारी खिडकियां
धक धकाति घुसती चली आ रही है ठंड

सूर्य भी लाचार है उसके सामने
रजाईयों में दुबक गए सारे मुस्तंद

पहनी जो स्वेटरे और ऊनी कोट
हमारा मुह चिढ़ा रही कैसी है ठंड

कौन करे हिम्मत जो मुक़ाबला करे
बच्चों इसका नाम है कड़कड़ाती ठंड

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