तुम मिली ही नहीं (Google kiya)
ढूंढा ही किया तुम्हे उम्र भर
तुम मिली ही नहीं स्वप्न भर के लिए !
मैंने भिडो में खोजा तुम्हे प्राणप्रिये
विरानो में खोज तुम्हे प्राणप्रिये
में पलकें उठाये देखा किया !
तुमने दिखी ही नहीं आंखियां भर के लिए !
ढूंढा ही किया तुम्हे उम्र भर के लिए !
भावना को सजाना लगा कल्पना
अक्षरों को बैठाना हो जो अल्पना
रचना को में लिखता मिटाता रहा
तुम मिली ही नहीं शब्द भर के लिए !
ढूंढा किया तुम्हे उम्रभर
तुम मिली ही नहीं स्वप्न भर के लिए !
मैंने पीड़ा का चमन जगाया प्रिये
पंथ काँटों का मैंने बनाया प्रिये
दर्द की चोखट को मैं छूता फिर
तुम मिली ही नहीं अश्क भर के लिए !
ढूंढा ही किया तुम्हे उम्र भर
तुम मिली ही नहीं स्वप्न भर के लिए !
तुम मिली ही नहीं स्वप्न भर के लिए !
मैंने भिडो में खोजा तुम्हे प्राणप्रिये
विरानो में खोज तुम्हे प्राणप्रिये
में पलकें उठाये देखा किया !
तुमने दिखी ही नहीं आंखियां भर के लिए !
ढूंढा ही किया तुम्हे उम्र भर के लिए !
भावना को सजाना लगा कल्पना
अक्षरों को बैठाना हो जो अल्पना
रचना को में लिखता मिटाता रहा
तुम मिली ही नहीं शब्द भर के लिए !
ढूंढा किया तुम्हे उम्रभर
तुम मिली ही नहीं स्वप्न भर के लिए !
मैंने पीड़ा का चमन जगाया प्रिये
पंथ काँटों का मैंने बनाया प्रिये
दर्द की चोखट को मैं छूता फिर
तुम मिली ही नहीं अश्क भर के लिए !
ढूंढा ही किया तुम्हे उम्र भर
तुम मिली ही नहीं स्वप्न भर के लिए !
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