चुटकी भर चांदनी

चुटकी भर चांदनी  रखकर हथेली पर
देखता हु तुमने सब व्योम भर डाला है !

आँखों में उतर आयी बावरी उमरिया
देखता हु तुमने सब सोम पी डाला है !

होठ भर हिले है पलक भर झुके है
देखता हु तुमने सब कुछ हो कह डाला है !

लाली, बिंदी, मेहंदी कंगन बिछिया चुनरी
देखता हु तन-मन सब उपवन कर डाला है !

अंगो से परिचय अभी तो हुआ है
देखता हु तुमने सब समर्पण कर डाला है !

Comments

Popular posts from this blog

मर गया होता

तुम आये नहीं

इत्ते सारे काम