चुटकी भर चांदनी
चुटकी भर चांदनी रखकर हथेली पर
देखता हु तुमने सब व्योम भर डाला है !
आँखों में उतर आयी बावरी उमरिया
देखता हु तुमने सब सोम पी डाला है !
होठ भर हिले है पलक भर झुके है
देखता हु तुमने सब कुछ हो कह डाला है !
लाली, बिंदी, मेहंदी कंगन बिछिया चुनरी
देखता हु तन-मन सब उपवन कर डाला है !
अंगो से परिचय अभी तो हुआ है
देखता हु तुमने सब समर्पण कर डाला है !
देखता हु तुमने सब व्योम भर डाला है !
आँखों में उतर आयी बावरी उमरिया
देखता हु तुमने सब सोम पी डाला है !
होठ भर हिले है पलक भर झुके है
देखता हु तुमने सब कुछ हो कह डाला है !
लाली, बिंदी, मेहंदी कंगन बिछिया चुनरी
देखता हु तन-मन सब उपवन कर डाला है !
अंगो से परिचय अभी तो हुआ है
देखता हु तुमने सब समर्पण कर डाला है !
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