सूरज के बहार भरे दिन

सूरज के बहार
भरे दिन

कुहुक रही अमराई
अम्बुका के ठाँव
चंपा चमेली के थिरक रहे पाव !

सूरज के उभार
भरे दिन !

चटख रहा टेसू
जंगल की चोर
चमकीले गेसू
ले रहे हिलोर !

सूरज के निखार
 भरे दिन !

सुर्ख लाल रंग
पलाश छा रहा !
महुआ की टेर
गीत कोई गा रहा !

सूरज के छूहार
 भरे दिन !

गदराई दोपहरी का
धूप भरा रंग
थके थके नयन
न देख पाये अंग !

सूरज के अंगार
भरे दिन !

अश्मित हवाओं का
साय साय गुंजन
नीम और पीपल का
करतल अभिननदन !

सूरज के शृंगार
भरे दिन !

नदी के अधर पर
रवि के अधर
प्यास ही प्यास
इधर उधर !

सूरज के प्यार
भरे दिन !


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