गीत सुनाने आऊंगा
तुमने मुझे बुलाया है तो गीत सुनाने आ जाऊंगा
तन का मन का, अपनेपन का गीत तुम्हे सुना जाऊंगा !
भाग रही है धरती सारी
नहीं किसी को फुर्सत पल की
किसकी आँखों में उमडा सावन
किसकी पीर आँख से छलकी !
इसी बहाने संग तुम्हारे पल भर जीवन प जाऊंगा
तुमने मुझे बुलाया है तो गीत सुनाने आ जाऊंगा !
अपने अपने में खोया है
सस्ट्री का यह सारा जन जीवन
कौन है जीता कोण है मरता
किसको चिंता अपना अर्चन !
शब्दों की इस क्षिप्रा के संग महाकाल को छू जाऊंगा
तुमने मुझे बुलाया है तो गीत सुनाने आ जाऊंगा !
कोई महल बनाता अपना
कोई ठोक रहा टपरी
कंचन दमके किसी के घर में
किसी की छत पर नहीं खपरिया !
वैभव विराग के इस सागर की एक लहर में पा जाऊंगा
तुमने मुझे बुलाया है तो गीत सुनाने आ जाऊंगा !
आपने हाथो गढ़ते प्रतिमा
को जाती है वाही पराई
हर पल छलती रहती है
अपनी स्वयं की परछाई !
आस नीरस के महारास में अपना गुंजन पा जाऊंगा
तुमने मुझे बुलाया है तो गीत सुनाने आ जाऊंगा !
तन का मन का, अपनेपन का गीत तुम्हे सुना जाऊंगा !
भाग रही है धरती सारी
नहीं किसी को फुर्सत पल की
किसकी आँखों में उमडा सावन
किसकी पीर आँख से छलकी !
इसी बहाने संग तुम्हारे पल भर जीवन प जाऊंगा
तुमने मुझे बुलाया है तो गीत सुनाने आ जाऊंगा !
अपने अपने में खोया है
सस्ट्री का यह सारा जन जीवन
कौन है जीता कोण है मरता
किसको चिंता अपना अर्चन !
शब्दों की इस क्षिप्रा के संग महाकाल को छू जाऊंगा
तुमने मुझे बुलाया है तो गीत सुनाने आ जाऊंगा !
कोई महल बनाता अपना
कोई ठोक रहा टपरी
कंचन दमके किसी के घर में
किसी की छत पर नहीं खपरिया !
वैभव विराग के इस सागर की एक लहर में पा जाऊंगा
तुमने मुझे बुलाया है तो गीत सुनाने आ जाऊंगा !
आपने हाथो गढ़ते प्रतिमा
को जाती है वाही पराई
हर पल छलती रहती है
अपनी स्वयं की परछाई !
आस नीरस के महारास में अपना गुंजन पा जाऊंगा
तुमने मुझे बुलाया है तो गीत सुनाने आ जाऊंगा !
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