धरती संवार लो
अम्बर से स्वर्ग को उतार लो
आज सारी धरती संवार लो !
सज उठे सवर उठे
धरती का आँगन भी
नगर नगर ग्राम ग्राम
डगर डगर कनन भी !
प्यासे पनघट को जलधार दो
आज सारी धरती संवार लो !
जन सुमन को गूथ लो
एकता के हर में
एक स्वर गुंजार हो
वीणा के हर तार में !
खुशियो को हाथ हाथ बाँट दो
आज सारी धरती संवार लो !
भेदभाव के तिमिर का
अंश-अंश छाँट दो
स्वार्थ के भवर में फंसी
नोक को घाट दो !
नेह दिप द्वार द्वार बाल दो
आज साडी धरती संवार लो !
शीश श्रद्धा से जहके
सभी धर्म ग्रन्थ पर
नित नया निर्माण हो
विकास के पंथ पर !
वसुधा के नूतन शृंगार दो
आज सारी धरती संवार लो !
आज सारी धरती संवार लो !
सज उठे सवर उठे
धरती का आँगन भी
नगर नगर ग्राम ग्राम
डगर डगर कनन भी !
प्यासे पनघट को जलधार दो
आज सारी धरती संवार लो !
जन सुमन को गूथ लो
एकता के हर में
एक स्वर गुंजार हो
वीणा के हर तार में !
खुशियो को हाथ हाथ बाँट दो
आज सारी धरती संवार लो !
भेदभाव के तिमिर का
अंश-अंश छाँट दो
स्वार्थ के भवर में फंसी
नोक को घाट दो !
नेह दिप द्वार द्वार बाल दो
आज साडी धरती संवार लो !
शीश श्रद्धा से जहके
सभी धर्म ग्रन्थ पर
नित नया निर्माण हो
विकास के पंथ पर !
वसुधा के नूतन शृंगार दो
आज सारी धरती संवार लो !
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