मेरी नाव में
घुंघरू बाँध गया कोई उसके पाँव में
बदली हुई हवा है अबके गाओं में !
ऐसी तपन, ऐसी उमस अबके मौसम में
लोग जल रहे नीम की छाँव में !
बाजी सारी हार दी बस एक आस में
की जीत ही जायेगा वो अगले दाव में !
सुकून से में रह सकु स्वीकार था नहीं
काटे बिखेर डाले उसने मेरी ठाव में !
कैसे ले जाऊंगा उस पार में उसको
छेद ही छेद है मेरी नाव में !
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