चहरे बदल के
बदनाम हो रहे बस्ती के अँधेरे !
बदतमीजी कर रहे कुछ घर के सवेरे :)
श्रम भिन्दुओ से जो रच रहे सभ्यता !
काचे पे धो रहे है वो अपने बसेरे !!
किस्से करे गुहार लचर मछरी !
ताल के रवैये बन बैठे मछेरे !!
पेटो से है वादे न भूखे मरेंगे !
जीने के लिए दे रखे है स्वप्न सुनहरे !!
ईमान के पुजारी धर्म की प्रतिष्ठा !
चेहरे बदल के बैठे है कुछ ऐसे लुटेरे !!
बदतमीजी कर रहे कुछ घर के सवेरे :)
श्रम भिन्दुओ से जो रच रहे सभ्यता !
काचे पे धो रहे है वो अपने बसेरे !!
किस्से करे गुहार लचर मछरी !
ताल के रवैये बन बैठे मछेरे !!
पेटो से है वादे न भूखे मरेंगे !
जीने के लिए दे रखे है स्वप्न सुनहरे !!
ईमान के पुजारी धर्म की प्रतिष्ठा !
चेहरे बदल के बैठे है कुछ ऐसे लुटेरे !!
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