बुलायो है
प्यार की पुकार से और मनुहार से
आज मनमीत ने घर हो बुलायो है !
रोम-रोम हरसे मन एसो सरसे
जाने मेरो चंडी आज दूध में नहायो है !
पग उठी किधरी पग घरउ किधरी !
एसो तन-मन ने सुध बिसरायो है !
प्रेम उमगि - उमंगी आज डिंग चिढ
सजल नयन जैसी सावन सजायो है !
धीर धरि धरनी धर्म धुरी धार के
धिरे धीरे धरन,धरन धधकायो है !
बार-बार उठी धऊ गली कहियां डारु
मीत मोसे कहे आज बावरो हो आयो है !
न सोयो न सूयाओ, रंग ऐसा घणो छायो
मन का मोहन देखो ऐसे हर्षयो है !
Comments
Post a Comment