विवश के गाल पर

कैसे हस्ताक्षर कर डाले तुमने समय के भाल पर
की नमी छा गए किसी विवश के गाल पर

तुमने जो सम्बन्ध बोये थे
अपनेपन के सपने बनवाए थे
आदर्शो के मीत  के

अपना उच्चापन देखर छोड़ा ऐसे ढाल पर
की नमी छा गए किसी विवश के गाल पर

प्रश्न चिन्ह की बनी तुम उत्तर
आगत बानी प्रतीक्षा की
बंटवाया की अर्थ बानी
परिणाम बानी परीक्षा की

विश्वासी प्रतिबिम्ब सौपकर छोड़ा ऐसे हल पर
की नमी छा गए किसी विवश के गाल पर

मरुथल से सुने जीवन से
मधुमासि अनुबंध किये

प्रतिमानों की पीड़ा पीकर
सुख के सब प्रतिबन्ध जिए

सारा सावन मुझसे लेकर छोड़ा ऐसे मलाल पर
की नमी छा गए किसी विवश के गाल पर

जाने ये मौसम बदला
या हवाओं राह की भटक गयी
जंगल के सूखे व्रक्षो पर
गंध कुसुम की लटक गयी

सांस सुवास लूटकर मुझपर, छोड़ा ऐसे पाल पर
की नमी छा गए किसी विवश के गाल पर !

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