जीवन

जीवन को किसने जाना है
किसने इसको पहचाना है
अलग अलग रूपों में जाना
फिर भी यह अनजाना है !


जीवन खुशियों का मेला है
जीवन दुखो का रेला है
कभी भीड़ - भाड़ बन जाता
तो कभी वह निपट अकेला है !

कही  गीत  कही तराना है
जीवन को किसने जाना है

काँटों में भी हँसता जीवन
भरी धूप में तपता जीवन
फूलों सा सुकुमार कही जीवन
और कही पाषाण है जीवन !

रोना और मुस्कुराना है
जीवन को किसने जाना है !

बहता जीवन ताड़ी सा लगता
ठहरा जीवन ताल सा लगता
संघर्षो का झरना तो
कभी गहरे सागर सा लगता
सीप से मोती पाना है
जीवन को किसने जाना है !

मौसम सा लगता है जीवन
प्रकृति के रंग सा है जीवन
कभी हरा भरा लहराता तो
कभी रुखा-सूखा लगता जीवन

लहरों पर लहराना है
जीवन को किसने जाना है !

कभी धरती की धीर सा लगता
कभी नयनो के नीर सा लगता
दुःख-दर्दो का पर्वत है तो

कभी पंछी की पीर सा लगता

कही जलना , कही जलाना है
जीवन को किसने जाना है !

रंगमंच सा दीखता, जीवन
पर्दा उठता गिरता जीवन
कभी नायक खलनायक तो
कभी विदूषक बनता जीवन

कभी खोना कभी पाना है
जीवन को किसने जाना है !

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