जीवन के चार दिन

पथरीली पीड़ाएं,मुसीबतों जंगल
दुर्गा रहे, न मिले कही मंगल

पोर-पोर कसके
पहाड़ के दिन
ऐसे भी होते है
जीवन के चार दिन !

किलोल खुशियां चहकता आकाश
पुष्पित है रहे उल्लासित सी स्वांस
पोर-पोर महके
बगिया से दिन
ऐसे भी होते है
जीवन के चार दिन

संघर्षी सबेरा
बिसरि हुई श्याम
दर कदम युद्ध
खोया विश्राम
पोर पोर चलते
सड़कों से दिन
ऐसे भी होते है
जीवन के चार दिन

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