भोर के प्रहर की तुम

तुम जो गुनगुनाती जैसे गुनगुनाती जिंदगी
भोर के प्रहर की तुम  जैसे बंदगी !

तुम ही सुरसिंगार हो
रश्मियों के राग की
ऋतू के सुहाग की
बगिया के फाग की !

तुम जो खिलखिलाती जैसे खिलखिलाती जिंदगी
भोर के प्रहर की तुम  जैसे बंदगी !

तुम तो एक समर्पण हो
भावना की रीत का

श्रृद्धा के संगीत का
मीत के प्रीत का

तुम जो महकती हो जैसे महकती है जिंदगी
भोर के प्रहर की तुम  जैसे बंदगी !

तुम तो एक गीत हो
शब्द के दुलार का

कल्पना के हार का
स्वप्नों के श्रृंगार का !

तुम जो सवरती हो जैसे सवरती है जिंदगी
भोर के प्रहर की तुम  जैसे बंदगी !

तुम तो एक प्रवाहिनी
नदिया के धार की
समय के पुकार की
वशी की मनुहार की

तुम जो बहती हो जैसे बहती है जिंदगी
भोर के प्रहर की तुम  जैसे बंदगी !

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