शरद चांदनी
श्वेत वस्त्र धार हुई सुंदरता निर्वासिनि !
जंगलों में भटकती हुई होती है शरद चांदनी !!
मखमल से, मलमल सी, छुई मुई सी गात !
दूध में नहाई हुई होती है शरद चांदनी !!
बिछी हुई हो जैसे कोई संगमरमरी दरी !
फिसलते नयन सी होती है शरद चांदनी !!
न तारे मन लुभाए न चुनरी रिझाये
उठे हुआ घूँघट सी होती है शरद चांदनी
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