बादल (यू गरजता है )

बादल

आने की खबर थी आये नहीं बादल
बस एक झलक को तरसा गए बादल !

कही बाँध भी नहीं सुखी पड़ी धरती
कही झूम-झूम नाचे है बादल !

ध्वस्त हो गए सपनो के सब महल
गर्दिशों के जब फट पड़े बादल !

दर्द विहरणी जे अंतस में उतर जाए
अश्क बनके झरने नयनो से ये बादल !

कभी घोडा कभी हाथी कभी परियो की कथाएं
बच्चों के लिए खेल हो जैसे ये बादल !

मौन ही सही उनकी भी है भाषा
हस्ते भी है कभी रोते भी है बादल


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