पीपल की छैया (मेरा देसी टिपिकल सैया )

घूम रही पवन-तपन डाले गलबहिया
ऐसे में याद आये पीपल की छैया

मौसम की बाह पकड़
चले प्रेम बतिया
आँगन चौबारे की
पीछे कनबतिया
देहरी द्वार देख देख
अरे दइया दइया
ऐसे में याद आये पीपल की छैया

ताने,उलाहने जब लांघे घर की देहरी
जैसे भोर होते ही हो जाये दोपहरी
संकोची मन की व्यथा
अरे ता- ता थैया
ऐसे में याद आये पीपल की छैया

जीवन के तर पर जब राग सज न पाये
पल-पल अँधियारा, धुंधलका दिखाए
प्राण उड़ना चाहे जब बनके चिरैया
ऐसे में याद आये पीपल की छैया 

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