आलम बदल गये

जब तलक था होश, वीरान थी बहार !
जाम जब उठाया तो मंजर बदल गए !!

यह हमारी बदनसीबी और उसका ये सिला !
इकरार थे हम कर रहे और वो बदल गये !!

जिनने कस्मे खाई थी एक नाव में बैठकर !
साहिल जो मिला तो मकसद बदल गये !!

रौशनी में नहाई होती है यू तो हर सुबह !
जब जब चिराग बुझे है आलम बदल गये !!

उनका वादा था तमाम उम्र का !
रहबर उन्हें मिले तो रही बदल गये !!

हम क्या बया करे बदलने की हदो का !
बरगद के नीचे बैठकर सिद्धार्थ बदल गये




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