परिवार में

मिल जुलकर खुशहाल रहे परिवार में
हंसी ख़ुशी का जीवन है परिवार में !

माँ की ममता, पिता का प्यार
बहन की राखी, भाई की हिम्मत सबकुछ है परिवार में !

देवर भाभी, जेठ-जिठानी, दादा-दादी फूफा-फूफी
रिश्तों का गुंजन होता परिवार में !

आंसू, पीड़ा, तने उलझन, मान-गुमान
ाककि जीवन हो जाता कभी कभी परिवार में !


झरता झरना, बहती सरिता , सागर सी गहराई
स्वप्ना शृंखला बन जाती है कभी कभी परिवार में !

सीमा रेखा खींची हुई हो दुरी चाहे बनी हुई हो
भावो के अटूट बंधन में रहते सब परिवार में !



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