देखा है तुज़हे

मैंने अश्को को आखो मैं छुपाते हुए देखा है तुज़हे
हर पल हस्ते हसाते देखा है तुज़हे 1

गजब के  हौसले है तेरी जिंदगी के
मोत से आँखे लड़ाते  देखा है तुज़हे !

जाने कब पलक ज़हपकाते  हो तुम
जब भी देखा है जागते हुए देखा  है तुज़हे !

हजार शिकवे है ज़माने से जानता हु
मगर हर शिकवे से गले मिलते हुए देखा है तुज़हे !

अपने लिए कितना जिया यह जानता  हु मगर
औरो के लिए सो बार मरते हुए देखा है तुज़हे !

जो हरजाई , बेवफा , बेरहम निकले
उनके लिए भी दुआ मांगते  हुए देखा है  तुज़हे  !

पीड़ा इबादत , इश्क़ और इलज़ाम
अपनी गजलो में समाते हुए  देखा है तुज़हे !


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