हिन्दू रीति के हिसाब से लोग सिद्धि प्राप्त करने हिमालय जाते है, ! गणेश सभी के आराध्य भी है मगर इस रूप में इस वृक्ष को देखना विचित्र और अध्बुध सा प्रतीत होता है ! oymyakon उर्फ़ ॐ यो कौन (महज एक नगर का नाम)
यू दर - बदर न होता गर उसका भी घर होता ! सहारा मिल गया उसे वर्ना मर गया होता ! पहचान लेता में उसे अगर जिंदगी का सहर होता ! मीरा मीरा न होती गर पिया जहर न होता !
दरवाजे पंथ निहारा करी तुम आये नहीं , तुम आये नहीं संध्याएं भी लौटकर जाने लगी रहें भी चुप्पी ढोती रही मैं आस का दीप जलाती रही ! खड़ी होकर आईने के सामने रूप सवार किया ही करी आँचल को उठाती गिराती रही प्रिय आये नहीं तुम आये नहीं दरवाजे पंथ निहारा करी प्रिय आये नहीं तुम आये नहीं में प्रीत में बावरी होती रही मछली सी बेकल तड़पती रही में हर पल भाव छुपाती रही प्रीत आये नहीं तुम आये नहीं मेने सेज बिछाई तुम्हारे लिए पाँव पायल भी बांधी तुम्हारे लिए प्याली पर प्याली गिरती रही दरवाजे पंथ निहारा करी प्रिय आये नहीं तुम आये नहीं में अक्षत कुमकुम रोली को थाली में संजोए बैठी रही में सुनी कलाई ढूंढा करी वीर आये नहीं तुम आये नहीं दरवाजे पंथ निहारा करी प्रिय आये नहीं तुम आये नहीं
नन्ही मुन्नी चिड़िया को इत्ते सारे काम न पलभर को फुर्सत न रत्ती भर आराम रोज सबेरे सूरज लाना उसको हर घर मैं पहुचना क्या है छोटा काम ? नन्ही मुन्नी चिड़िया को इत्ते सारे काम ! घर-आँगन की साफ-सफाई उछल-कूद कर करती भाई क्या है छोटा काम ? नन्ही मुन्नी चिड़िया को इत्ते सारे काम ! बाजार जाना और बतियाना पाठ पढ़ना और पढ़ाना क्या है छोटा काम ?
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