प्रवाह तो मिला

चाँद ना मिला , आभास तो मिला
सूर्य न मिला , प्रकाश तो मिला

गीत न मिला कोई धुन ही मिली
सुने शब्द के लिए, सिलसिला तो मिला !

मंज़िल न मिली रही को मगर
चने के लिए, चलने के लिए विश्वास  तो मिला !

थकी हुई नदी की लहरे मोन थी
मंद हवा ही सही, प्रवाह तो मिला !

भटक रही थी नव नदी के धार में
टुटा ही सही पर घाट तो मिला !

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